Health Pacer

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Natural Foods Which are Easy to Digest

Some natural foods are substances that are found in nature. I call them health pacer. They are easy to digest and give health pace. They do not have any kind of adulteration. I would like to tell you about those natural foods which are easy to digest. 


Natural Foods Which are Easy to Digest


हर घर में कोई बीमार व्यक्ति होता है। उसकी दवाइयों पर और शरीर की देख-रेख  पर भी बहुत ध्यान दिया जाता है। बीमार होने के कारण रोगी का शरीर कमजोर हो जाता है और उसका हाजमा भी ठीक से काम नहीं करता। ऐसी स्थिति में परिवार वाले रोगी के खान-पान की ओर ध्यान नहीं देते। रोगी को उसके पाचन तंत्र के अनुसार भोजन देना आवश्यक होता है। यदि रोगी अच्छी दवाइयां ले रहा है मगर उसका पाचन कमजोर है तो वे दवाइयां उस पर पूरा असर नहीं करेंगीं। इसलिए पाचन को मजबूत बनाने वाले भोजन लेना चाहिए। कुछ इस प्रकार के भोजन नीचे बताये जा रहे हैं -

दलीया -


दलिया पोषक तत्वों का भण्डार होता है। दलिया मानव सभ्यता के जितना पुराना है। भारत में आज भी रोगी के लिए दलिया सर्वोत्तम आहार माना जाता है। सरकार के द्वारा चलाये जा रहे अस्पतालों में दलिया दूध के साथ दिया जाता है। यह शरीर में जाने के साथ ही लिवर इसे पचाना शुरू कर देता है। यह कब्ज नहीं होने देता। कब्ज शरीर में बहुत बीमारियों की जड़ होती है। दलिया खाने से कब्ज की संभावना नही रहती और रोग के जल्दी ठीक होने मदद मिलती है। दलिया कई अनाजों  मिलाकर बनाया जाता है।इसमें रेशों की मात्रा अधिक होती है और फैट कम होता है। रेशे शरीर के लिए उपयोगी होते हैं। दलीया मीठा हो या नमकीन, स्वादिष्ट और सेहत को ठीक रखने वाला होता है। घर पे दलिया बनाना बड़ा आसान होता है। इसे बनाने के लिए दो या दो से अधिक अनाज दरदरा कूटकर भून कर रख लें। ये भुना हुआ अनाज खराब नही होता। आवश्यकता के अनुसार चावल की तरह से दलिया बना लें। स्वाद के अनुसार मीठा या नमकीन बना लें।  आपके लिए प्राकृतिक संतुलित भोजन तैयार है। अगर आप नमक की जगह सेंधा नमक प्रयोग करें और चीनी की जगह देसी खांड प्रयोग करें, तो और भी अच्छे परिणाम मिलेंगे। दलिया  दूध या लस्सी के साथ खाना चाहिए।   

 मूंग की दाल 



 मूंग की दाल के विषय में सब जानते है। मूंग दाल चने की तुलना में पचने में आसान होती है और इसके health benefits भी अधिक होते हैं। अंकुरित मूंग के पोषक तत्व कई गुना बढ़ जाते हैं और इसे पचने के लिए शरीर द्वारा की जाने वाली मेहनत 80%  कम लगती है। अंकुरित मूंग दाल immune system को मजबूत करती है। विषाक्त तत्वों को शरीर से बाहर निकालकर खून की कमी को पूरा करने में सहायक है। इसे अंकुरित करके खाने से शरीर को बल मिलता है। एक या दो मुठी मूंगी दाल लेकर दो गुना पानी में दो घंटे के लिए भिगो दें। दो घंटे बाद इस दाल को छानकर सूती कपडे में बांधकर रख दें अथवा किसी खूंटी पर लटका दें। 24 घंटे के अंदर इसमें अंकुर निकल आते हैं। इस दाल को धोकर नमक मिलाकर चबाकर खाएं। रोज मुंग दाल इस तरह खाने से स्वास्थ्य में विशेष सुधार होता है।  शरीर में घोड़े जैसा बल और फुर्ती आ जाती है। 



Moong dal water for Kids Health and Old Age


मूंग की दाल को कूट लो। फिर इसे पानी में भीगो दें। दो घंटे के बाद उस पानी को दाल सहित उबाल लें। इस पानी को छान लें और नमक मिलाकर बच्चों को पिलायें और वृद्धों को भी। इस पानी में मूंग के पुरे पोषक तत्व होते हैं। 5 महीने के शिशुओं को यह दाल का पानी पिलाया जा सकता है। जो बूढ़े व्यक्ति अन्य भोजन हजम नही कर सकते, उनके लिए यह पानी चमत्कार का कार्य करता है। बहुत खराब अवस्था वाले रोगी को यह दाल का पानी अवश्य लेना चाहिये।     

मक्की रोटी और सरसों का साग



इसमें लोहा, पोटैशियम, फोलिक एसिड, विटामिन्स, रेशे आदि बहुत मात्रा में होते हैं। शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ाता है। शरीर को ऊर्जा मिलती है। सरसों का साग बच्चे और बूढ़े लोगों के लिए वरदान का कार्य करता है। रोगियों को सप्ताह में कम से कम चार बार सरसों और मक्की की रोटी खिलाने से आंका रोग तेज गति से ठीक होने लगता है। 
सरसों का साग आसानी से पच जाता है। मक्की की रोटी तो मुंह में जाते ही पिघल जाती है। गेहूं के मुकाबले मक्की की रोटी में फैट कम होता है और रेशे अधिक होते हैं। यही वजह है जिस कारण अनाजों में मक्की को गेहूं से श्रेष्ठ माना गया है। 



भारत के पंजाब और हरियाणा में मक्की के साथ सरसों का साग खाया जाता है। ये भोजन शर्दी की ऋतू में उपयोग किया जाता है। गांव के लोग साग में घी डालकर खाते हैं। ये सरसों का साग खेतों में से ताजा लाकर घर में बनाते हैं। इसे भारत में हरा साग भी कहते हैं। ये अत्यधिक स्वादिष्ट होता है। स्वाद के साथ-साथ इसमें पोषक तत्वों के भण्डार होते हैं। पोषण के मामले में सरसों का साग बाकि सब सब्जियों से बहुत आगे है। 



सरसों के साग और मक्की की रोटी की एक सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसमें घी को अधिक मात्रा में मिलाकर खाने से घी भी पूरा हजम हो जाता है। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो घी खा लें तो उनको दस्त (loose motion)लग जाते हैं। मगर इस भोजन साथ घी कोई नुकसान नहीं देता। इसके विपरीत घी की ताकत और ऊर्जा शरीर को मिलती है।


खिचड़ी -


पुरे भारत में सबसे सुलभ शाकाहारी भोजनों में से खिचड़ी को अहम् स्थान प्राप्त है। यह भारत के लोकप्रिय व्यंजनों में से एक है। यह बनाने में आसान होती है। छोटे बच्चे और बूढ़े व्यक्ति और बीमार लोग खिचड़ी को बेहद पसंद करते हैं. यह तुरंत पचने वाली होती है और खिचड़ी से पेट भर जाता है। जो छोटे बच्चे खाते समय आना कानी करते हैं और पेट भर नहीं खाते, वे भी खिचड़ी दूध के साथ खुश होकर खाते हैं। खिचड़ी बहुत पौष्टिक होती है, यह हल्का भोजन होती है और आसानी से पच जाने वाली होती है।
चावल और मूंग दाल से खिचड़ी बनाई जाती है। इसमें कैल्सियम, मैग्निसियम, फास्फोरस होता है। इसकी Nutrition Value बढ़ाने के लिए इसमें शब्जियां भी मिला सकते हैं।  इसके अनेक लाभ होते हैं। यह नरम,हलकी और सुपाच्य होती है। किसी भी बीमारी सी ग्रस्त व्यक्ति के लिए खिचड़ी खाना लाभदायक होता है। 
खिचड़ी खाने से शरीर में से अनावश्यक तत्व बाहर निकल जाते हैं। क्योंकि खिचड़ी सुपाच्य होती है, इसलिए  से पेट में भारीपन महसूस नहीं होता। 
इसमें fat की मात्रा बहुत कम होती है। लगातार खिचड़ी खाने वाले लोगों के शरीर में लगातार स्फूर्ति और ताजगी बढ़ती जाती है। खिचड़ी शरीर का वजन कम करती है। कम कैलोरी युक्त भोजन होने से खिचड़ी इन्सुलीन के आनुपातिक निर्माण में सहायक होती है। मरीज को शुगर कंट्रोल रखने में सहायता होती है। अतः खिचड़ी एक आसानी से पचने वाला प्राकृतिक खाद्य पदार्थ है। हर घर में इसका उपयोग होना चाहिए।   

Honey Benefits 



शहद एक प्राकृतिक भोजन है। यह अत्यधिक स्वादिष्ट,और पोषण देने वाला  होता है। पोषक तत्वों से भरपूर शहद तुरंत पच जाता है। यह चीनी से 50 गुना मीठा हो जाता है। यह प्राकृतिक रूप में  मिलता है। अनेक यूनानी और आयुर्वेदिक दवाइयां, शहद के साथ खाई जाती हैं। क्योंकि शहद में तुरंत पचने का गुण है, इसलिए जब शहद के साथ दवाई ली जाती है, वह दवा शहद के साथ मिलकर पच जाती है। शहद के साथ दवा लेने से दवा का असर कई गुना बढ़ जाता है। शरीर पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। शहद में कैल्शियम, फास्फेट, आयरन ,ग्लूकोस, क्लोरीन, मैग्निसियम आदि सूक्ष्म खनीज पदार्थ होते हैं। ये खनीज पदार्थ हमें bacteria से बचाते हैं।


बकरी का दूध













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